मम्मी-पापा को उम्मीद थी की मेरा बच्चा पढ़ेगा लिखेगा और आगे बढ़ेगा और हमारा नाम रोशन करेगा लेकिन पढ़ाई-लिखाई में मन नही लगा। आवारगी करके लव, ब्रेकअप और पैचअप में फसकर सिगरेट, बियर और दारू चलने लगा।
अब पढ़ाई तो सिर्फ नाम की हो गयी है और दिखावे की ज़िंदगी सुरु हो गयी है फेसबुक, इंस्टाग्राम, और सोशल मीडिया की जब जेब में पैसे नहीं होते थे झूठे स्टेटस लगा कर और खुद को अमीर बताने लगा।
लास्ट बेंचमें दोस्तों के साथ मस्ती में कैसे निकला पता ही नहीं चला। स्कूल छूटने का अफसोश तो था लेकिन रिजल्ट देखकर पछतावा भी होने लगा की पुरे 4 साल जो इम्पोर्टेन्ट थे लाइफ के वो मैंने पल भर के ख़ुशी के लिए बर्बाद कर दिए लेकिन घर पर मम्मी-पापा ने मुझे फिर से सपोर्ट किया।
जो खुद करते थे मजदूरी लेकिन मुझसे कहा बेटा तू अच्छे से कॉलेज में एडमिशन ले ले चिंता मत कर पैसो की क्योकि उनको अब भी उम्मीद थी की बच्चा मेरा पढ़ेगा लिखेगा और नाम रोशन करेगा।
फिर पापा के सेविंग से अपना एडमिशन कराया और खुद से वादा किया की अब पूरी फोकस के साथ मैं पढूंगा और जो मुझे भटकाने की कोशिश करते है उनसे दूर रहूँगा और जल्द से जल्द कॉलेज कम्पलीट करके उनका सपना पूरा करूँगा लेकिन नहीं …. कॉलेज में जाते ही नये और पुराने सभी दोस्तों के साथ भूल गए वो वादा जो खुद से किया था।
फिर से वही आवारगी करके लव, ब्रेकअप और पैचअप में फस करके दिखावे की ज़िंदगी बड़ी बाइक बड़ा फ़ोन का सपना देखने लगा। टाइम, पैसा, सपना सब बर्बाद करने लगा। हर साल के आये ख़राब रिजल्ट को नेक्स्ट ईयर अच्छा करने का आश्वाशन देकर खुद को चिट करने लगा।
कॉलेज के सभी साल बस यू ही गुजरते गए और फाइनल रिजल्ट में खुद को इतना निचे देखकर फिर से पछताने लगा घर में आकर झूठ बोला की कॉपी ही ठीक से चेकिंग नहीं हुयी है सारे रिजल्ट ख़राब आये है।
फिर गया नौकरी की तलाश में, सारे आवारगी ख़राब रिजल्ट बॉडी पर बनाये टैटू की मुझे अब सजा मिलने लगी थी। सारे अच्छे जॉब्स की क्राइटेरिया मेरे स्किल और रिजल्ट से कोसो दूर थे। हर बार रिजेक्ट होने के बाद मेरा सेल्फ कॉन्फिडेंस ऐसा गिरा जो कभी ना उठा। कितने रातो को फिर मैं रो-रो कर सोया।
फिर एक दिन पापा की बिगड़ी हुयी तबियत को देखकर एक जगह छोटी सी नौकरी करने लगा क्योकि किसी अच्छे नौकरी के मैं लायक नहीं बन पाया लेकिन उसके बाद भी मेरे मम्मी-पापा को उम्मीद थी की मेरा बेटा एक दिन जरूर बड़ा आदमी बनेगा और वो हमारे बुढ़ापे का सहारा बनेगा।
तो क्यों करू मैं समय को बर्बाद, ज़िंदगी में इतनी गलतिया कर चुके है की सोचने बैठे तो खुद पर शर्म आ जाये। खुद को और खुद की फैमिली को इतना चीट कर चुके है जो की बताने के लायक नहीं है। सही समय पर सही काम मैंने किया नहीं सिर्फ टाइम पास में मन लगाया खुद को हीरो समझा जिसको हर चीज़ शॉर्टकट में मिल जाती थी लेकिन अब समझ में आता है की सक्सेस की कोई शॉर्टकट नहीं है।
लेकिन ये सब सोचकर मैं निराश नहीं होऊंगा जो गलती हुयी है मुझसे मैं उसका पश्चाताप करूँगा। इंटरप्रेन्योर, बिजनेसमैन, आर्टिस्ट जॉब जो भी मेरा सपना था उनको मैं पूरा करूँगा। चाहे जो हो जाये अब पीछे नहीं हटूंगा। अगर दिन भर जॉब में चला जाये तो घर आते ही अपने गोल्स पर फोकस करूँगा उसके लिए सुबह जल्दी उठूंगा रात देर से सोऊंगा।
जिंदगी में जब एक पल भी खाली मिले वो मैं अपने गोल्स को दूंगा और अब कोई एक्सक्यूज़ नहीं दूंगा फालतू की सोशल मीडिया से कोसो दूर रहूँगा और उस लाइफ को पाने के लिए खुद को मेहनत की आग में जलाऊंगा।
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