चाणक्य के अनुसार अगर कोई आपका पहली बार अपमान करे और आप कुछ भी ना कहे या उसको सहन कर ले तो उनकी नजर में आप समझदार इंसान है 
और अगर वही इंसान दोबारा अपमान करे फिर भी आप अपने गुस्से को काबू कर ले तो आप महान है

लेकिन अगर कोई आपका बार बार अपमान करे और आप कुछ भी ना करे तो आप चाणक्य की नजर में सबसे बड़े मूर्ख है

इसको एक उदहारण के माध्यम से समझने की कोशिश करते है 
2 दोस्त थे एक का नाम सुरेश था और दूसरे का नाम रमेश था सुरेश सीधा बच्चा था और रमेश बदमाश था दोनों दोस्त स्कूल में साथ पढ़ाई करते थे लेकिन रमेश सुरेश की बार-बार मजाक उड़ाया करता था रमेश हमेशा ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ता था जिसमें उसकी बेइज्जती ना हो अब ऐसा करते करते उनकी स्कूल लाइफ तो खत्म हो गई लेकिन रमेश का यह स्वभाव उसके साथ ही रहा जैसे उसकी नौकरी लगी तो उसने उसको फेसबुक पर सर्च किया 
अंततः उसको सुरेश का नंबर मिल गया और उसको मैसेज किया हेलो लूजर आजकल तुम कहां हो मेरे हिसाब से तुम कोई चाय की दुकान चला रहे होंगे बहुत ही जल्द मैं तुमसे तुम्हारी चाय की दुकान में मिलूंगा और हम खूब सारी बातें करेंगे यह सुनकर सुरेश भी थोड़ा सा गुस्से में हुआ 
लेकिन उसने अपनी प्रतिक्रिया को रोक लिया और उसको नजरअंदाज करते हुए उस बात को भूल गया
शादी होने के बाद थोड़ा रमेश काआत्मविश्वास बढ़ने लगा उसने एक बार फिर से सुरेश को फोन किया कि आजकल तुम कहां हो या ऐसे ही चाय की दुकान चला करअपनी जिंदगी बिता दोगे सुरेश ने इस बार भी कोई जवाब नही दिया
थोड़े दिन बाद रमेश को एक बेटी हुई सब कुछ बढ़िया था लेकिन डॉ. ने कहा कि उसके दिल मे एक छेद है इसका इलाज करने के लिए 50 से 60 लाख रुपये की जरूरत  रमेश की तो ऐसी की तैसी हो गयी क्योंकि ना तो उसके पास कोई लाखो रुपये वाली काम थी और ना ही उसके पास इतने रुपये थे जिससे वो इलाज करवा सके 
मतलब कुल मिला कर रमेश के बस की बात नही थी उसने डॉ. को मना कर दिया  कि उससे ये सब व्यवस्था नही हो पाएगी 
लेकिन अचानक एक दूसरे डॉ. ने मामला
 को गम्भीर मानते हुए ऑपरेशन मुफ़्त में कर दिया 
और  रमेश को यह सुनकर बहुत खुशी हुई और इंतजार करने लगा कि कब ऑपरेशन खत्म होगा और कब वह अपनी बच्ची एवम उस डॉक्टर से मिल पाएगा 
 इंतजार की घड़ी खत्म हुई और डॉक्टर सुरेश और उसकी बेटी,रमेश के सामने आ चुके थे 
रमेश की आंखें नम थी और  बेटी को लेने के बाद, उस डॉक्टर के पैरों में गिर गया आप समझ सकते हो कि ऐसा क्यों हुआ 
जिस डॉक्टर ने ऑपरेशन किया था वह डॉक्टर सुरेश था वहीं  जिसका सुरेश पूरी जिंदगी मजाक उड़ाया करता था 
रमेश ने पैरों में गिर कर माफी मांगी 
क्योंकि वो शर्मिंदा है अपनी हरकतों की ऊपर,
कि उसने जिस दोस्त की इतनी मजाक उड़ाई है वो आज
काबिल है, उसने उस दोस्त की मदद की है जिसने हमेशा उसकी मजाक उड़ाई
 उसने कहा कि विजय  मुझे माफ कर दो,मैं तुम्हारा एहसान नहीं भूल पाऊंगा 

लेकिन दोस्त ऐसा नहीं है यह मेरा फर्ज था और दोस्त होने के नाते मैंने तुम्हारे साथ ऐसा किया 
लेकिन जब रमेश ने पूछा कि जब तुम्हारे साथ इतना बुरा होता है तो तुम क्या करते हो तो सुरेश ने जवाब दिया कि जब तुम मेरी मजाक उड़ाया करते थे तब मैं हमेशा सकारात्मक नजरिए से अपने गुस्से को सही दिशा दिया करता था और आज तुम्हारे दिलाए गुस्से की वजह से ही मैं इतना बड़ा बन पाया हूं कि मैंने अपने गुस्से को सही दिशा देना सीख लिया है 

दोस्तों  कुछ लोग नेगेटिविटी में भी पॉजिटिविटी ढूंढ लेते है और कुछ लोग नेटिविटी को 
हमेशा ब्लेम करते रहते हैंआशा करता हूं कि 

आप को इन बातों का मर्म समझ में आया होगा और अगर चाणक्य नीति को आप अपने जीवन में उतारते हो तो यकीनन आप भी एक दिन उस मुकाम को हासिल कर पाओगे जहां पर आप जाना चाहते हैं अगर आप आचार्य चाणक्य की ओर भी नीतियों को जानना चाहते हो और उनकी सोच को समझना चाहते हो तो आप बिल्कुल सही जगह पर हो यहां पर आपको आगे इससे भी बेहतर चीजें मिलती रहेगी और मुझे आपका साथ चाहिए आपका कीमती समय देने के लिए दिल से धन्यवाद....
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