आपकी सोच



अंगुलिमाल की ये कहानी जरूर पढिये ।
काफी समय पहले की बात है,गौतम बुद्ध के जमाने की है 
अंगुलिमाल नाम का एक शक्श था उसने एक प्रतिज्ञा ली
कि वो 1000 लोगो को मारेगा और अंगुलियों की माला गले मे पहनेगा ।
उसने ऐसा ही किया 999 लोगो को मार चुका था सब लोग उससे थर थर कांपते थे ।
राजा भी उससे डरता था ।
जहा वो रहता था वहाँ कोई नही जाता था ।


एक दिन बुद्ध उस रास्ते पर जा रहे थे, साथी भिक्षु ने कहा कि 
ये रास्ता सही नही है, हमारे लिए यहाँ खतरा है,
हमारी जान भी जा सकती है ।
उसने बुद्ध को बताया कि, यहा अंगुलिमाल नाम का 
शक्श रहता है जो लोगो को मारता है ।
बुद्ध ने कहा अब तो जाऊंगा,
उसे मेरी जरूरत है।

तुझे अपनी जान प्यारी है तो तू भाग जा
अब बुद्ध उसके सामने जा पहुंचे।
एक सन्यासी का तेज देख कर उसके क्रोध की ज्वाला ओर धधक उठी
बोला सन्यासी आज मेरी प्रतिज्ञा पूरी हो जाऐगी आज मैं 1000 वा वध करूँगा


उसका क्रोध  चरम सीमा पर था,
वो बोला बुद्ध को,
तू लौट जा नही तो तुझे मार दूंगा
बुद्ध बोले
मार दे
बोला रुकजा सन्यासी
बुद्ध बोले मैं तो 50 साल पहले रूक गया,
अब तो तू रूक जा,
इतने में बुद्ध बोले मार दे पर पहले मेरी बात सुन


वो पेड़ की टहनी काट के बता
एक झटके में टहनी के दो टुकड़े कर दिए
बुद्ध मन ही मन सोचने लगे कि बात तो मान रहा है,
यानी इसके बदलने की संभावना है ।

बुद्ध बोले अब इस टहनी को जोड़ के बता,
वो बोला सन्यासी तू पागल है जो एक बार टूट जाता है वो जोड़ा नही जा सकता ।
बुद्ध बोले यही तो तुझे समझा रहा हूं,


आंखे भर आयी उसकी बुद्ध के चरणों मे आ गिरा
बुद्ध पीछे मुड़ गए
और वो भी बुद्ध के पीछे पीछे आ गया ।

अब वो भिक्षु बन चुका था बुद्ध ने कहा जाओ
भिक्षा मांग कर लाओ ।
अब वो गया लोगो ने उस पर
पत्थर मारे
खून से लथपथ सना हुआ
बुद्ध के पास आ गया

बुद्ध बोले पीड़ा हो रही है ?

वो तो सिर्फ इस नास्तिक शरीर को हुई है ।

गन्दा मन तो तू वही छोड़ आया है ।

तो एक विचार आपकी जिंदगी बदल सकता है ।

जो आदमी इतने वध करने के बाद भी सन्यासी बन सकता है, तो बदलाव सम्भव है ।

 पढ़ने के लिए और आपका कीमती समय देने के लिए दिल से आपका
शुक्रिया।